Sunday, January 12, 2020

आत्मा से आत्मा का मिलन ही सात्विक प्रेम

हमारे शरीर का सूक्ष्म तत्व आत्मा में निहित है। जब आत्मा शरीर को छोड़ देती है, तो जीव मृत अवस्था को प्राप्त हो जाता है। अब बात आती है आत्मा के स्पन्दन की। हमारे शरीर में आत्मा की क्रिया और प्रतिक्रिया किस प्रकार हमारे जीवन को प्रभावित करती है। इस विषय को भलीभांति जान लेना अति आवश्यक है। बात भारतीय परिवेश की करें, तो यहां आत्मा का महत्व कुछ ज्यादा ही है। हमारे रिश्ते, नाते, सम्बन्ध, परिवार, समाज और देश भावनात्मक आत्मीय मिलन से ओत प्रोत हैं। इनमें इतनी जटिलता का प्रेम है, जिसे कोई किसी भी कीमत पर अलग नहीं कर सकता। हमारे रिश्तों, नातों और सम्बन्धों की डोर ही है, जो हमें परिवार, समाज और देशभक्ति से जोड़े हुए है। अन्यथा ये भारत भूमि इतने अत्याचार सहन करने के बाद कब की विखण्डित हो चुकी होती। प्रेम की पराकाष्ठा ने मां भारती के ह्दय स्थल को हमेशा सकारात्मक ऊर्जा प्रदान कर गौरवान्वित किया है।
भारत की धरा पर न जाने कितनी भाषाएं, कितने धर्म और कितनी जाति निवास करती हैं, लेकिन सबकी आत्मा में भारत माता की आत्मीय छवि विराजमान है। हर कोई अपनी मातृभूमि पर हंसते-हंसते जान देने को तैयार है। ये कोई आश्चर्य नहीं और न कोई दिखावा है। ये तो केवल इस देश की संस्कृति का मूल मंत्र है, जो यहां निवास करने वाले प्रत्येक जीव जगत की आत्मा में बसता है। देश की आजादी और उससे पहले न जाने कितने देशभक्त मातृभूमि की खातिर देश पर कुर्बान हो गए और ये सिलसिला आज भी लगातार जारी है। हमारी आत्मा इस देश की मिट्टी में बसती है। इस देश पर कोई आंच न आने पाए इसलिए हम अपना सर हथेली पर लेकर चलते हैं।
आत्मा से आत्मा के इस मिलन पर मुगलों ने और अंग्रेजों न जाने कितने अत्याचार किए और इस पावन भूमि को तहस-नहस करने की कोई कोर कसर नहीं छोड़ी, लेकिन इस धरा से निकलते प्रेम नाद की शक्ति के आगे, मुगल और गौरे औधे मुंह जा गिरे, ये है हमारे आत्मीय प्रेम की महाशक्ति। भारत की इस पावन धरा के अमर प्रेम को कोई भी ताकत मिला नहीं सकती। बल्कि ये प्रेम अनंत और अनंत तक अमर रहेगा। आदिकाल से लेकर वर्तमान तक के प्रेममयी इस सफर को बनाने वाले हमारे महापुरुषों की तपस्या व्यर्थ नहीं जा सकती। प्रेम, त्याग और भक्ति की प्रतिमूर्ति भारत देश हमेशा सर्वोपरि था और हमेशा पूज्यनीय ही रहेगा। केवल जरूरत है इस सात्विक प्रेम को आत्मसात करने की और जन-जन के ह्दय में आत्मीय प्रेम जगाने की, ताकि हम अपने पूर्वजों के सपने को साकार कर सकें। ये हमारा कर्तव्य है आओ इस आत्मीय प्रेम का अलख जगाकर विश्व विजय का आह्वान करें। जय हिन्द!

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