Wednesday, January 8, 2020

आज किस मोड़ पर है पत्रकारिता?

वर्तमान में पत्रकारिता तीन स्वरूपों में विभाजित हो चुकी है। प्रिंट मीडिया, इलैक्ट्रोनिक मीडिया और सोशल मीडिया। जिस प्रकार तेजी से डिजिटलाइजेशन हुआ, ठीक उसी प्रकार सोशल मीडिया ने जबरदस्त प्रगति करते हुए आम आदमी को इसका आदी बना दिया है। जिसकी बजह से प्रिंट और इलैक्ट्रोनिक मीडिया की टीआरपी में भारी गिरावट देखी जा सकती है। इसके साथ-साथ पत्रकारिता के बदले स्वरूप ने भी मीडिया के अस्तित्व पर सवाल खड़े किए हैं और इसकी मुख्य बजह पत्रकारिता को व्यवसाय की श्रेणी में ला खड़ा करना। अब इसके मायने बदले, स्वरूप बदला और पत्रकारिता की कार्यशैली भी बदल गई। लिहाजा अब मीडिया जगत में पत्रकारिता के वर्चस्व को बचाने की नोहबत आ खड़ी हुई है। सोशल मीडिया विस्तार ने प्रिंट और इलैक्ट्रोनिक मीडिया को हिला कर रख दिया है।
ये परिवर्तन का युग है। जहां पहले प्रिंट, फिर इलैक्ट्रोनिक और सोशल युग है, ऐसे में ये कहना गलत नहीं होगा कि अब हर व्यक्ति को सही मायने में अभिव्यक्ति की आजादी मिल गई है। अब सवाल ये उठता है कि तो क्या फिर मीडिया जो देश का चैथा स्तम्भ है उसका विस्तार हुआ है या फिर उसकी अहमियत अब सीमित हो गई है। जब से टीआरपी की दौड़ में मीडिया ने खुद को शामिल करते हुए व्यावसायिक पत्रकारित को आत्मसात किया है, तब से पत्रकारिता के मायने ही बदल गए हैं, या यूं कहिए कि लोगों के विश्वास में मीडिया के प्रति कमी आई है। इसकी खास बजह सोशल मीडिया की कार्यशैली से बखूबी लगाया जा सकता है। कारण स्पष्ट है। सोशल मीडिया पर त्वरित खबरों के सम्पादन की होड़ ने तथ्य परख, निष्ठावान और निडर पत्रकारिता की साख को बट्टा जरूर लगाया है। लेकिन इस आज की आपाधापी में अब प्रिंट और इलैक्ट्रोनिक मीडिया भी शामिल हुए है। जिसने मीडिया के वास्तविक स्वरूप को दरकिनार करते हुए गलत ट्रेक पर कदम रख अपने पैरों पर कुल्हाड़ी मार ली है।
अब सवाल है कि आखिर मीडिया अपने पुरातन स्वरूप को कैसे हासिल करेगा? अपनी साख, अस्तित्व और विश्वास को कैसे फिर से लोगों के अंदर कायम करेगा। क्या आने वाला कल मीडिया के लिए कांटों भरा होगा, या फिर एक बार फिर मीडिया अपनी कार्यप्रणाली में सुधार लाते हुए सबकुछ ठीक कर लेगा? वहीं सोशल मीडिया की कार्यशैली को कैसे सुधारा जाएगा, क्या सरकार सोशल मीडया को वास्तविक मीडिया का दर्जा देगी? ये तमाम प्रश्न हैं, जो आने वाले कल को देने होंगे। हम आपके जवाबों का भी इंतजार करेंगे। आपके सुझाव पुरातन और आधुनिक पत्रकारिता के लिए महत्वपूर्ण हो सकते हैं। इस भटकाव के समय में सच्चे और निष्ठावान विचारक मीडिया का सहयोग अपने विचारों के माध्यम से कर सकते हैं। तो आप उठाइए कलम और लिख डालिए अपने विचारों को, आखिर आप क्या बेहतर सोचते हैं।

No comments:

Post a Comment

मजहब नहीं सिखाता....?

भारत देश की एकता और अखण्डता पर आज प्रश्न चिन्ह खड़े होना निराशाजनक ही नहीं अपितु बड़ी चिन्ता का विषय है। बात देश के वर्तमान हालात की है। चारो...